देशद्रोह और राजद्रोह में फर्क

अपन ने एक मित्र को समझाया, देशद्रोह और राजद्रोह में फर्क होता है। देशद्रोह तब होता है, जब कोई देश के साथ गद्दारी करे। इस अपराध पर रोक के लिए अलग कानून है।


राजद्रोह का मतलब होता है, सरकार की मुख़ालिफ़त। हमारा संविधान हमें अपनी सरकार की आलोचना करने का अधिकार देता है। कांग्रेस ने जिस कानून को खत्म करने की बात की है, वह राजद्रोह के खिलाफ इस्तेमाल होने वाला कानून है। यानी, संविधान हमें सरकार की आलोचना करने का जो अधिकार देता है, यह कानून उस अधिकार को बाधित कर देता है। कोई सरकार किसी विरोधी की छोटी सी बात को भी अगर दिल पर ले ले, तो उसे उठाकर आराम से जेल में पटक सकती है। एक लोकतांत्रिक देश में आलोचक को जेल में डालने का अधिकार किसी भी सरकार को नहीं दिया जा सकता।


इसीलिए हर समझदार नागरिक को राजद्रोह कानून खत्म करने के कांग्रेस के प्रस्ताव का समर्थन करना चाहिए। सरकार अलग चीज होती है, देश अलग चीज। सरकारें आती-जाती रहती हैं। जैसे 23 मई को यह सरकार चली जाएगी, लेकिन देश जिंदाबाद है और रहेगा।


गजब की बात यह है कि अपन के मित्र को यह बात समझ में आ गई। वह अबकी बार अड़े नहीं। उन्होंने हमें इस बात के लिए धन्यवाद भी दिया कि हमने उन्हें विषय को ठीक से समझाया। उनमें भक्ति का तत्व लगभग खत्म होने से अपन आश्चर्यचकित हैं और उत्साहित भी।
हरिबोल...।


'राजेन्द्र चतुर्वेदी की वाल से आभार सहित'


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