ब्रेकिंग::--👉👉दिव्यांग विद्यार्थियों के लिये विशेष शिक्षा की व्यवस्था हो::==राज्यपाल


डाॅ0 शकुन्तला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय का सातवां दीक्षान्त समारोह सम्पन्न


विद्यार्थी राष्ट्रगौरव के साथ-साथ विश्व कल्याण की भावना से ओतप्रोत हो, नई शिक्षा नीति क्षेत्रीय भाषाओं, स्वदेशी ज्ञान और तकनीकी पर आधारित हैl

लखनऊः 14 दिसम्बर, 2020

उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं कुलाधिपति श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने डाॅ0 शकुन्तला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय, लखनऊ के सातवें दीक्षान्त समारोह को सम्बोधित करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय दिव्यांग विद्यार्थियों में अंतर्निहित विशिष्ट बौद्धिक क्षमता को विकसित कर उन्हें राष्ट्र निर्माण के महान कार्य हेतु गतिशील करने में उल्लेखनीय योगदान दे रहा है। उन्हांेने कहा कि इस विश्वविद्यालय से शिक्षा एवं प्रशिक्षण के बाद उपाधि धारकों में एक नई ऊर्जा और आत्मविश्वास का संचार हो रहा है तथा आजीविका, रोजगार एवं स्वरोजगार के अनेक अवसर उपलब्ध हो रहे हैं। 

राज्यपाल ने कहा कि वास्तव में शिक्षा के माध्यम से हमें ऐसे विद्यार्थियों को गढ़ना है जो राष्ट्र-गौरव के साथ-साथ विश्व-कल्याण की भावना से ओत-प्रोत हों और वे सही मायने में ग्लोबल सिटिजन बन सकें। उन्होंने कहा कि यह विश्वविद्यालय दिव्यांग विद्यार्थियों के पठन-पाठन, आकलन एवं उनके मूल्यांकन की विधियों में व्यापक सुधार के संबंध में विचार कर अपेक्षित सुधारों को लागू करें। राज्यपाल ने दीक्षान्त समारोह में 121 विद्यार्थियों को 151 मेडल देकर सम्मानित किया। 

श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों हेतु विश्वविद्यालय परिसर में डाक-घर का शुभारम्भ किया तथा विश्वविद्यालय पर डाक टिकट निर्गत किया। इसके साथ ही राज्यपाल ने पूर्व प्रधानमंत्री एवं भारत रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी की प्रतिमा का अनावरण एवं उनकी कविता पर आधारित विथिका का उद्घाटन भी किया। उन्होंने कहा कि स्व0 अटल बिहारी वाजपेयी की यह प्रतिमा विद्यार्थियों को सदैव आगे बढ़ने एवं देश प्रेम की प्रेरणा देती रहेगी।

राज्यपाल ने कहा कि देश की क्षेत्रीय भाषाओं, संस्कृति, विचारों एवं मूल्यों पर केन्द्रित नई शिक्षा नीति स्वदेशी ज्ञान और तकनीक के आधार पर नये भारत को शक्तिशाली बनाने में सहायक होगी तथा इस शिक्षा नीति से अन्तर्विषयक एवं बहुविषयक पठन-पाठन तथा शोध को प्रोत्साहन मिलेगा। उन्होंने कहा कि इस शिक्षा नीति में तकनीकी शिक्षा, भाषाई बाध्यताओं को दूर करने, दिव्यांग विद्यार्थियों के लिये शिक्षा को सहज और सुगम बनाने आदि के लिये तकनीकी के प्रयोग को बढ़ावा देने पर बल दिया गया है। राज्यपाल ने कहा कि इसमें सन्देह नहीं कि नई शिक्षा नीति ने बालिकाओं की शिक्षा में आने वाली बाधाओं को समझा है और उन्हें दूर कर बालिका शिक्षा प्रोत्साहन के सभी उपाय किये गये हैं।

श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने कहा कि आंगनवाड़ी केन्द्र पर भी दिव्यांग छात्रों के लिए विशेष शिक्षा की व्यवस्था की जानी चाहिए। इसके लिये जरूरी है कि शिक्षकों को नई शिक्षा नीति के तहत प्रशिक्षण दिया जाय। साथ ही एक देश एक पाठ्यक्रम की व्यवस्था भी लागू होनी चाहिए। उन्होंने अभिभावकों का आह्वान किया कि वे नई शिक्षा नीति को जानें और उसे प्राथमिक, माध्यमिक तथा उच्च स्तर तक लागू करने में अपनी सहभागिता सुनिश्चित करें। आज की परिस्थिति में 60 प्रतिशत शिक्षक कार्य आनलाइन हो रहा है जबकि 40 प्रतिशत अध्यापकों के माध्यम से हो रहा है। हमें अपनी पीढ़ी को कुशल नागरिक बनाना है। देश के लिये कुछ कार्य करने है। अतः हमें सोचना चाहिए कि मैंने देश के लिये क्या किया और मैं देश के लिये क्या कर सकता हूं। हमें इसी सोच के साथ आगे बढ़ना है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, मुख्य अतिथि एवं पूर्व अध्यक्ष साहित्य अकादमी नई दिल्ली डा0 विश्वनाथ प्रसाद तिवारी, दिव्यांगजंन सशक्तीकरण मंत्री श्री अनिल राजभर, दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री हेमन्त राव सहित अन्य गणमान्य लोग भी उपस्थित थे।

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