:ब्रेकिंग लोक-भवन :==आने वाले समय में उत्तर प्रदेश क्या नया होगा पढ़ें 👉👉मंत्रिपरिषद के महत्वपूर्ण निर्णय

लखनऊ: 25 जनवरी, 2021

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी की अध्यक्षता में आज मंत्रिपरिषद द्वारा निम्नलिखित महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए:-

‘उत्तर प्रदेश डाटा सेण्टर नीति-2021‘ को मंजूरी

मंत्रिपरिषद ने ‘उत्तर प्रदेश डाटा सेण्टर नीति-2021‘ को मंजूरी प्रदान कर दी है। मंत्रिपरिषद द्वारा यह निर्णय भी लिया गया है कि समय की आवश्यकताओं के अनुरूप ‘उत्तर प्रदेश डाटा सेण्टर नीति-2021‘ में मुख्यमंत्री जी के अनुमोदनोपरान्त परिवर्तन किया जा सकेगा। यह नीति अधिसूचना की तिथि से 05 वर्ष तक अथवा उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा कोई नई नीति/संशोधन किए जाने तक लागू रहेगी।

उत्तर प्रदेश डाटा सेण्टर नीति के अन्तर्गत राज्य में 250 मेगावॉट डाटा सेण्टर उद्योग विकसित किया जाना, राज्य में 20,000 करोड़ रुपए का निवेश आकृष्ट किया जाना तथा कम से कम 03 अत्याधुनिक निजी डाटा सेण्टर पाक्र्स स्थापित कराए जाने का लक्ष्य है। नीति के अन्तर्गत डाटा सेण्टर पाक्र्स और डाटा सेण्टर इकाइयों को पूंजी उपादान, ब्याज उपादान, भूमि के क्रय/पट्टे पर स्टाम्प ड्यूटी में छूट तथा ऊर्जा से सम्बन्धित वित्तीय प्रोत्साहनों के अतिरिक्त विभिन्न गैर वित्तीय प्रोत्साहन भी दिए जाएंगे। बुन्देलखण्ड तथा पूर्वांचल क्षेत्रों के लिए अतिरिक्त प्रोत्साहन की व्यवस्था की गई है।

डाटा सेण्टर इकाइयों के आस-पास बड़ी संख्या में सूचना प्रौद्योगिकी तथा सूचना प्रौद्योगिकी जनित इकाइयों की स्थापना होती है। इनमें प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष रूप से बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर सृजित होते हैं। इस नीति से प्रदेश में 03 सम्भावित डाटा सेण्टर पाक्र्स तथा 10 डाटा सेण्टर इकाइयों की स्थापना से लगभग 4,000 व्यक्तियों हेतु प्रत्यक्ष एवं 10,000 से 20,000 व्यक्तियों के लिए अप्रत्यक्ष रोजगार प्राप्त होने की सम्भावना है। इससे जन-सामान्य का सामाजिक-आर्थिक उत्थान होगा।

डाटा सेण्टर नीति निर्गत होने से इस क्षेत्र के सम्भावित निवेशक प्रदेश में अपने डाटा सेण्टर अथवा सूचना प्रौद्योगिकी या सूचना प्रौद्योगिकी जनित सेवा उद्योगों की स्थापना हेतु प्रोत्साहित होंगे। ग्लोबल डाटा सेण्टर्स जैसे अमेजाॅन, गूगल, माइक्रोसाॅफ्ट, आई0बी0एम0 इत्यादि के आने की सम्भावना बढ़ेगी। इससे उत्तर प्रदेश विश्वस्तर पर प्रतिष्ठित हो सकेगा एवं डाटा स्टोरेज में देश और प्रदेश आत्मनिर्भर बनने की दिशा में अग्रसर हो सकेगा।

वर्तमान में देश का अधिकांश डाटा देश के बाहर संरक्षित किया जाता है। डाटा सेण्टर पाक्र्स और डाटा सेण्टर इकाइयों की स्थापना हेतु प्रदेश में अभी कोई डाटा सेण्टर नीति नहीं है। इसके दृष्टिगत प्रदेश सरकार द्वारा डाटा सेण्टर नीति बनाए जाने का निर्णय लिया गया है। इस नीति के प्रख्यापन से पूर्व ही, राज्य सरकार को कई प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिन पर राज्य सरकार द्वारा सक्रियता से कार्य किया जा रहा है।

प्रदेश सरकार के प्रयासों के फलस्वरूप उत्तर प्रदेश में सभी प्रकार के उद्योगों के लिए एक अनुकूल वातावरण बना है। बड़ी संख्या में देश-विदेश के निवेशक उत्तर प्रदेश में अपने उद्योगों की स्थापना के लिए आकर्षित हो रहे हैं। वर्तमान प्रदेश सरकार कार्यभार ग्रहण करने के पश्चात् राज्य में उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए लगातार काम कर रही है।

कोविड-19 कालखण्ड के उपरान्त बदलती हुई परिस्थितियों में राज्य सरकार द्वारा अनेक नई नीतियों की घोषणा की गई है। ‘पिछड़े क्षेत्रों के लिए त्वरित निवेश प्रोत्साहन नीति-2020‘ के अन्तर्गत राज्य सरकार द्वारा प्रदेश के पूर्वांचल, मध्यांचल और बुन्देलखण्ड क्षेत्रों में औद्योगिक विकास के केन्द्रों की स्थापना के उद्देश्य से नई औद्योगिक इकाइयों को फास्ट ट्रैक मोड में आकर्षक प्रोत्साहन प्रदान किए जा रहे हैं। इसी प्रकार गैर-आई0टी0 आधारित स्टार्ट-अप्स को बढ़ावा देने के लिए एक नई स्टार्टअप नीति-2020 घोषित की गई तथा ‘उ0प्र0 इलेक्ट्राॅनिक्स विनिर्माण नीति-2020’ उद्घोषित की गई है।

विश्व बैंक सहायतित डैम रिहैबिलिटेशन इम्पू्रवमेण्ट प्रोजेक्ट फेज-2 एवं फेज-3 के अन्तर्गत उत्तर प्रदेश के नियंत्रणाधीन बांधों के पुनर्वास एवं सुधार की परियोजना अनुमोदित

मंत्रिपरिषद ने विश्व बैंक सहायतित डैम रिहैबिलिटेशन इम्पू्रवमेण्ट प्रोजेक्ट फेज-2 एवं फेज-3  (DRIP Phase-II & Phase-III) के अन्तर्गत उत्तर प्रदेश राज्य के नियंत्रणाधीन बांधों के पुनर्वास एवं सुधार की परियोजना को अनुमोदित कर दिया है।

परियोजना के अन्तर्गत उत्तर प्रदेश राज्य के नियंत्रणाधीन 39 बांध सम्मिलित हैं। इन बांधों के पुनरुद्धार/पुनर्वास की परियोजना की कार्यावधि 10 वर्ष है, जो 02 चरणों में अर्थात 05-05 वर्ष में पूर्ण की जाएगी। परियोजना की अनुमानित लागत धनराशि 1249 करोड़ रुपए है। इसका 70 प्रतिशत अर्थात धनराशि 874.30 करोड़ रुपए विश्व बैंक द्वारा ऋण के रूप में तथा 30 प्रतिशत, 374.70 करोड़ रुपए की धनराशि राज्य सरकार द्वारा वहन की जाएगी।

परियोजना के प्रथम चरण का प्रारम्भ वित्तीय वर्ष 2020-21 में किया जाएगा। परियोजना के प्रथम चरण (ड्रिप फेज-2) के अन्तर्गत राज्य के लिए 529 करोड़ रुपए की धनराशि प्राविधानित है, जिसका 70 प्रतिशत अर्थात धनराशि 370.30 करोड़ विश्व बैंक द्वारा ऋण के रूप में तथा 30 प्रतिशत अर्थात धनराशि 158.70 करोड़ रुपए राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाएगा।। ड्रिप फेज-2 के अन्तर्गत राज्य के 30 बांधों का पुनरुद्धार किया जाएगा।

परियोजना के द्वितीय चरण (ड्रिप फेज-3) के अन्तर्गत राज्य के लिए 720 करोड़ रुपए की धनराशि प्राविधानित है। इसका 70 प्रतिशत अर्थात 504 करोड़ रुपए की धनराशि विश्व बैंक तथा 30 प्रतिशत धनराशि अर्थात 216 करोड़ रुपए राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाएगा। ड्रिप फेज-3 में राज्य के 09 बांधों का पुनरुद्धार किया जाएगा।

उत्तर प्रदेश नगर योजना और विकास (विकास शुल्क का निर्धारण, उद्ग्रहण एवं संग्रहण) (प्रथम संशोधन) नियमावली, 2021 अनुमोदित

मंत्रिपरिषद ने उत्तर प्रदेश नगर योजना और विकास (विकास शुल्क का निर्धारण, उद्ग्रहण एवं संग्रहण) नियमावली, 2014 में संशोधन के प्रस्ताव को अनुमोदित करते हुए उत्तर प्रदेश नगर योजना और विकास (विकास शुल्क का निर्धारण, उद्ग्रहण एवं संग्रहण) (प्रथम संशोधन) नियमावली, 2021 को मंजूरी प्रदान कर दी है।

मंत्रिपरिषद द्वारा यह निर्णय भी लिया गया है कि प्रदेश के समस्त विकास प्राधिकरणों, विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरणों, उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद तथा समस्त विनियमित क्षेत्रों द्वारा अपने-अपने नियमों के अन्तर्गत विहित प्रक्रिया के अनुसार उत्तर प्रदेश नगर योजना और विकास (विकास शुल्क का निर्धारण, उद्ग्रहण एवं संग्रहण) (प्रथम संशोधन) नियमावली, 2021 को अंगीकृत किया जाएगा। नियमावली के सम्बन्ध में होने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों का निराकरण करने के उद्देश्य से तत्सम्बन्धी निर्णय लेने के लिए विभागीय मंत्री के रूप में मुख्यमंत्री जी को अधिकृत किया गया है।

उत्तर प्रदेश नगर योजना और विकास (विकास शुल्क का निर्धारण, उद्ग्रहण एवं संग्रहण) नियमावली, 2014 में विकास क्षेत्रों की उनकी भौतिक स्थिति, जनसंख्या के आकार, आर्थिक विकास के स्तर, भूमि सम्पत्ति की कीमतों के दृष्टिगत 05 श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया था।

इस नियमावली के अन्तर्गत विकास शुल्क की दरें मुख्य नगरों को दृष्टिगत रखते हुए निर्धारित की गई थी, जो उसी विकास क्षेत्र में स्थित अन्य छोटे नगरों, जो कम विकसित हैं एवं जिनकी आर्थिक क्षमता कम है, पर भी समान रूप से लागू है। इन उपनगरों में विकास का स्तर न्यून होने के साथ-साथ नागरिकों की देय-क्षमता अपेक्षाकृत कम है। इस कारण ऐसे विकास क्षेत्र जहां एक से अधिक नगर शामिल हैं, यहां मुख्य नगर के सन्दर्भ में निर्धारित विकास शुल्क की दरों से उपनगरों के निवासियों तथा विकास प्राधिकरण दोनों को कठिनाई हो रही है। इसके दृष्टिगत छोटे नगरों/उपनगरों के लिए विकास शुल्क की दरों को युक्तियुक्त किया गया है।

इसके अन्तर्गत गाजियाबाद विकास क्षेत्र में लोनी, मोदीनगर एवं मुरादनगर, कानपुर विकास क्षेत्र के अन्तर्गत अकबरपुर माती एवं बिठूर, आगरा विकास क्षेत्र के अन्तर्गत फतेहपुर-सीकरी, वाराणसी विकास क्षेत्र के अन्तर्गत पं0 दीनदयाल उपाध्याय नगर, बुलन्दशहर विकास क्षेत्र के अन्तर्गत जहांगीराबाद एवं शिकारपुर हापुड़-पिलखुवा विकास क्षेत्र के अन्तर्गत गढ़मुक्तेश्वर, मथुरा-वृन्दावन विकास क्षेत्र के अन्तर्गत कोसीकला-छाता-चैमुहा-नन्दगांव तथा गोवर्धन-राधाकुण्ड का विकास शुल्क कम/युक्तियुक्त किया गया है।

बरेली को श्रेणी-3 में तथा मुजफ्फरनगर (शामली एवं खतौली नगरों सहित), फिरोजाबाद-शिकोहाबाद व उन्नाव-शुक्लागंज विकास क्षेत्रों को उनकी जनसंख्या आकार एवं ग्रोथ पोटेंशियल को दृष्टिगत रखते हुए श्रेणी-5 से श्रेणी-4 में उच्चीकृत किया गया है।

विकास शुल्क की दरों में एकरूपता और पारदर्शिता रखने हेतु प्राधिकरणों द्वारा अपने स्तर पर प्रत्येक वित्तीय वर्ष के 15 फरवरी तक गत वर्ष के काॅस्ट इन्फ्लेशन इण्डेक्स के आधार पर पुनरीक्षित किया जाएगा और प्राधिकरण बोर्ड का अनुमोदन प्राप्त कर 01 अप्रैल से लागू किया जाएगा। जिन प्रकरणों में मानचित्र स्वीकृत होकर मांग पत्र जारी हो चुके हैं। ऐसे प्रकरणों में विकास शुल्क की वसूली मांग-पत्र के अनुसार ही की जाएगी, जबकि संशोधित नियमावली जारी होने के उपरान्त प्रस्तुत आवेदनों तथा प्राधिकरणों में स्वीकृति हेतु विचाराधीन/प्रक्रियान्तर्गत प्रकरणों में संशोधित नियमावली के प्राविधान लागू होंगे।

निर्मित क्षेत्र एवं विकसित क्षेत्र के अन्तर्गत ऐसे पार्क एवं खुले स्थल/हरित क्षेत्र/क्रीड़ा स्थल, जिनका क्षेत्रफल 10 हेक्टेयर या अधिक हो, में कुल तल क्षेत्रफल के आधार पर विकास शुल्क देय होगा। 01 हेक्टेयर से बडे़ भूखण्ड हेतु विकास शुल्क का भुगतान किस्तों में किया जा सकेगा।

जनपद हरदोई के बेरिया घाट मेला का प्रान्तीयकरण किए जाने का निर्णय

मंत्रिपरिषद ने जनपद हरदोई के बेरिया घाट मेला का प्रान्तीयकरण किए जाने का निर्णय लिया है। मेले के प्रान्तीयकरण किए जाने सम्बन्धी अधिसूचना की अन्तर्वस्तु में संशोधन/परिवर्तन की आवश्यकता होने पर सुसंगत संशोधन/परिवर्तन के लिए मंत्री, नगर विकास विभाग को अधिकृत किया गया है।

ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, धार्मिक एवं पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण होने तथा मेले के अन्तर्राज्यीय स्वरूप के दृष्टिगत बेरिया घाट मेले की समुचित व्यवस्था एवं सफल आयोजन हेतु इसके प्रान्तीयकरण का निर्णय लिया गया है। इस मेले में लगभग 05 लाख दर्शनार्थी/श्रद्धालु प्रतिभाग करते हैं। जनपद हरदोई के बेरिया घाट मेले का आयोजन वर्तमान में जिला पंचायत हरदोई व जिला प्रशासन द्वारा किया जाता है। इस मेले के प्रान्तीयकरण के उपरान्त इसका प्रबन्धन जिलाधिकारी हरदोई द्वारा किया जाएगा। मेले के आयोजन पर होने वाले व्ययभार का वहन शासन द्वारा धनराशि की उपलब्धता के आधार पर किया जाएगा।

स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय, यथा-देवरिया, एटा, फतेहपुर, गाजीपुर, हरदोई, मिर्जापुर, प्रतापगढ़, सिद्धार्थनगर तथा जौनपुर में फैकल्टी के चयन के लिए सोसायटी गठन सम्बन्धी बायलॉज के प्रस्तर-32(1) की तालिका के बिन्दु-1 में संशोधन करते हुए कुलपति, अटल बिहारी वाजपेयी चिकित्सा विश्वविद्यालय, लखनऊ का नाम अंकित किए जाने का निर्णय l

मंत्रिपरिषद ने स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय, यथा-देवरिया, एटा, फतेहपुर, गाजीपुर, हरदोई, मिर्जापुर, प्रतापगढ़, सिद्धार्थनगर तथा जौनपुर में फैकल्टी के चयन के लिए सोसायटी गठन सम्बन्धी बायलॉज के प्रस्तर-32(1) की तालिका के बिन्दु-1 में संशोधन करते हुए कुलपति, अटल बिहारी वाजपेयी चिकित्सा विश्वविद्यालय, लखनऊ का नाम अंकित किए जाने का निर्णय लिया है। साथ ही, बायलाॅज के प्रस्तर-5 के अन्तर्गत उप प्रस्तर-20 के उपरान्त उप प्रस्तर-20ए  'NMC' means 'The National Medical Commission' जोड़ दिए जाने तथा जहां-जहां  'MCI' अथवा  'Medical Council of India' अंकित है, उनके स्थान पर  'MCI' or 'NMC' अंकित करने का निर्णय लिया है।

उल्लेखनीय है कि चिकित्सा शिक्षा विभाग के अन्तर्गत अटल बिहारी वाजपेयी चिकित्सा विश्वविद्यालय, उत्तर प्रदेश अधिनियम-2018 दिनांक 15 अक्टूबर, 2020 से लागू होने के फलस्वरूप 09 स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालयों में फैकल्टी के चयन हेतु कुलपति, अटल बिहारी वाजपेयी चिकित्सा विश्वविद्यालय, लखनऊ को अध्यक्ष के रूप में सम्मिलित कर लिया जाए। इससे इन 09 स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय के लिए फैकल्टी के चयन के लिए कुलपति, अटल बिहारी वाजपेयी चिकित्सा विश्वविद्यालय की अध्यक्षता में एक अतिरिक्त कमेटी गठित हो जाएगी, जिससे फैकल्टी के चयन में शीघ्रता होगी।

यह भी उल्लेखनीय है कि भारत सरकार की अधिसूचना दिनांक 25 सितम्बर, 2020 द्वारा MCI के स्थान पर NMC हो गया है।  The National Medical Commission Act, 2019 के प्रस्तर-61 में यह व्यवस्था दी गयी है कि MCI की समस्त परिसम्पतियों एवं दायित्व NMC को हस्तानान्तरित कर दिए गए हैं तथा इण्डियन मेडिकल काउंसिल एक्ट-1956 के प्राविधान भी प्रचलित रहेंगे। NMC Act के अन्तर्गत MCI के मानक रिजर्व रहेंगे, इसलिए बायलॉज में MCI के स्थान पर  'MCI' or 'NMC' अंकित किया जा रहा है।

राज्य विधान मण्डल के दोनों सदनों का वर्ष 2021 का प्रथम सत्र 16 फरवरी, 2021 को आहूत किए जाने का निर्णय

मंत्रिपरिषद ने राज्य विधान मण्डल के दोनों सदनों का वर्ष 2021 का प्रथम सत्र मंगलवार, 16 फरवरी, 2021 को आहूत किए जाने के प्रस्ताव को अनुमोदित कर दिया है। 

प्रदेश में स्पोट्र्स विश्वविद्यालय की स्थापना हेतु ‘दि उत्तर प्रदेश स्टेट स्पोट्र्स यूनिवर्सिटी बिल-2021’ का आलेख अनुमोदित

मंत्रिपरिषद ने प्रदेश में स्पोट्र्स विश्वविद्यालय की स्थापना हेतु ‘दि उत्तर प्रदेश स्टेट स्पोट्र्स यूनिवर्सिटी बिल-2021’ के आलेख को अनुमोदित कर दिया है। ‘दि उत्तर प्रदेश स्टेट स्पोट्र्स यूनिवर्सिटी बिल-2021’ को राज्य विधान मण्डल के आगामी सत्र में पुरःस्थापित/पारित कराकर अधिनियमित किए जाने का प्रस्ताव है। बिल के अधिनियमित होने के उपरान्त विश्वविद्यालय की परिनियमावली प्रख्यापित की जाएगी।

उत्तर प्रदेश स्टेट स्पोट्र्स यूनिवर्सिटी की स्थापना का उद्देश्य प्रदेश में खेल संस्कृति तथा उत्कृष्टता लाना तथा फिजिकल एप्टीट्यूड, स्किल्स व खेलों में रिकॉर्ड स्थापित करने तथा पदक जीतने के लिए खिलाड़ियों को खेल की व्यावहारिक आधारित (प्रैक्टिकल बेस्ड) शिक्षा प्रदान करना है, जिससे खिलाड़ी राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित प्रतियोगिताओं में पदक प्राप्त कर सकें। यह विश्वविद्यालय एक शिक्षण तथा एफिलिएटिंग विश्वविद्यालय होगा। इस विश्वविद्यालय में स्पोट्र्स सम्बन्धित विषय में सैद्धान्तिक (थ्योरी) व प्रायोगिक (प्रैक्टिकल) पेपर्स का विषय ज्ञान के आधार पर डिग्री दी जाएगी।

खेलों के विकास एवं उदीयमान खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण उपलब्ध कराने हेतु प्रदेश में स्पोट्र्स यूनिवर्सिटी स्थापित करने का निर्णय लिया गया है। इसमें फिजिकल एजुकेशन, हेल्थ एण्ड एप्लाइड स्पोट्र्स साइंसेज, स्पोट्र्स मैनेजमेण्ट एण्ड टेक्नोलॉजी, स्पोट्र्स कोचिंग, स्पोट्र्स जर्नलिज्म एण्ड मास मीडिया टेक्नोलाॅजी, एडवेन्चर स्पोट्र्स एण्ड यूथ अफेयर्स के अन्तर्गत निर्धारित पाठ्यक्रमों द्वारा स्नातक, परास्नातक, डिप्लोमा, सर्टिफिकेट, एम0 फिल0 तथा पी0एच0डी0 तक की शिक्षा की सुविधा प्रदान की जाएगी।

स्पोट्र्स यूनिवर्सिटी की स्थापना ग्राम सलावा, तहसील सरधना, जनपद मेरठ में की जाएगी। इसके निर्माण की अनुमानित लागत 700 करोड़ रुपए है। इस परियोजना में केन्द्र सरकार का कोई व्यय भार नहीं है। स्पोट्र्स यूनिवर्सिटी की स्थापना से असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को रोजगार प्राप्त होगा तथा खिलाडियों की कोचिंग से भविष्य में रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे।

जनपद अयोध्या स्थित हवाई पट्टी को एयरपोर्ट के रूप में विकसित किए जाने के सम्बन्ध में

मंत्रिपरिषद ने जनपद अयोध्या स्थित हवाई पट्टी को एयरपोर्ट के रूप में विकसित किए जाने हेतु अतिरिक्त भूमि का क्रय राजस्व विभाग के शासनादेश संख्या-2/2015/215/एक-13-2015-20(48)/2011 दिनांक 19 मार्च, 2015 द्वारा विहित व्यवस्था के अनुसार किए जाने हेतु अनुमानित लागत लगभग 4,26,48,47,440 रुपए (चार अरब, छब्बीस करोड़, अड़तालीस लाख, सैंतालीस हजार, चार सौ, चालीस रुपए मात्र) के व्यय की प्रशासकीय एवं वित्तीय स्वीकृति प्रदान कर दी है।

मंत्रिपरिषद द्वारा क्रय की गई भूमि को ‘श्री राज्यपाल द्वारा निदेशक, नागरिक उड्डयन, उ0प्र0’ के नाम दर्ज किए जाने के प्रस्ताव पर भी अनुमोदन प्रदान किया गया है। भूमि क्रय करने में किसी प्रकार का अवरोध उत्पन्न होने की स्थिति में भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनस्र्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता अधिकार अधिनियम, 2013 के अन्तर्गत भूमि का अधिग्रहण किए जाने के प्रस्ताव को भी अनुमोदन प्रदान किया गया है।

मंत्रिपरिषद द्वारा जनपद अयोध्या स्थित हवाई पट्टी को एयरपोर्ट के रूप में विकसित करने एवं अन्य सम्बन्धी कार्यों के सम्बन्ध में भविष्य में यथावश्यकता निर्णय लेने हेतु मुख्यमंत्री जी को अधिकृत किया गया है।

ज्ञातव्य है कि अयोध्या स्थित हवाई पट्टी को ए320 जैसे बड़े विमानों के लिए विकसित करने के उद्देश्य से इस हवाई पट्टी में रनवे और टर्मिनल बिल्डिंग आदि का निर्माण कराया जाएगा। इस कार्य के लिए 233 एकड़ भूमि की व्यवस्था की जाएगी।

नोएडा इण्टरनेशनल ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट, जेवर के विस्तारीकरण के लिए भूमि अधिग्रहण के सम्बन्ध में

मंत्रिपरिषद ने  Project Monitoring and Implementation Committee (PMIC) की बैठक दिनांक 03 दिसम्बर, 2020 में की गयी संस्तुतियों को अनुमोदित करते हुए नोएडा इण्टरनेशनल ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट जेवर पर अतिरिक्त रनवे का निर्माण कराए जाने के निमित्त कन्सल्टेण्ट द्वारा तैयार की गई फीजिबिलिटी प्रोजेक्ट रिपोर्ट, अक्टूबर, 2020 पर अनुमोदन प्रदान कर दिया है। साथ ही, मंत्रिपरिषद ने  phase-1/stage-2  के लिए 1365 हेक्टेयर भूमि का क्रय/अधिग्रहण भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनव्र्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता अधिकार अधिनियम, 2013  (The Right to Fair Compensation and Transparency in Land Acquisition, Rehabilitation and Resettlement Act, 2013) में विहित व्यवस्थानुसार किए जाने के प्रस्ताव को अनुमोदन प्रदान किया गया है। मंत्रिपरिषद द्वारा परियोजना के सम्बन्ध में समय-समय पर यथा आवश्यकतानुसार निर्णय लेने के लिए मुख्यमंत्री जी को अधिकृत किया गया है।

ज्ञातव्य है कि नोएडा इण्टरनेशनल एयरपोर्ट में चरणबद्ध ढंग से 05 रनवे विकसित किए जाएंगे। यह अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा प्रतिवर्ष 08 मिलियन टन कार्गो तथा 23 मिलियन यात्रियों को सेवाएं प्रदान करने में सक्षम होगा। पूर्ण रूप से विकसित होने के पश्चात् यह एयरपोर्ट दक्षिण एशिया का सबसे बड़ा हवाई अड्डा होगा।

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