:ब्रेकिंग :--👉👉विश्व कछुआ दिवस के अवसर पर कछुओं बचाने के लिए अरुणिमा के अभिनव प्रयोग::==पढें आनन्द प्रकाश गुप्ता की रिपोर्ट

 अब दुर्लभ कछुओं को आसानी से पहचाना व बचाया जा सकता है कछुओं की सुरक्षा के लिए वेवसाइट और ऐप हुई लाँच

बहराइच 23 मई 2021 

रविवार को विश्व कछुआ दिवस के अवसर पर कछुओं की प्रजाति को आसानी से पहचानने और उनको सही स्थान तक पहुचाने के उद्देश्य से एक वेव साइट और एक ऐप का लॉन्च किया गया।

सरयू नदी के किनारे तीन साल से शोध कर रही अरुणिमा ने बताया कि बहराइच में सरयू का किनारा कछुओं के सर्वाइवल के लिए बहुत उपयुक्त स्थान है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में कछुओं की 15 प्रजातियों में से सरयू के किनारे 11 प्रजातियों का पाया जाना बहुत ही सौभाग्य की बात है। इतनी अधिक प्रजातियों के मिलने से यह प्रतीत होता कि यह इलाका कछुओं की उतपत्ति के लिए काफी अनुकूल है। इसीलिए 2008 से इनके संरक्षण के लिए यहाँ एक प्रोजेक्ट चलाया जा रहा है। मैं भी इस प्रोजेक्ट से 2018 से जुड़ी हुई हूँ इस प्रोजेक्ट के तहत हम लोग स्कूली बच्चों, मछुआरों और नदी के किनारे रहने वाले लोंगो को कछुओं के बारे में जागरूक करते है और नई वेवसाइट और ऐप की मदद से अब और आसानी से दुलर्भ प्रजातियों को पहचाना जा सकता और बचाया जा सकता है।

कुछ दशकों से स्वच्छ जलीय कच्छप (Turtle) एवं कुर्म (Tortoise) अपने परिवास के विनाश, अवैध व्यापार एवं मांस तथा अंडे के शिकार तथा अन्य मानव द्वारा की जा रही उनके परिवास के पास की जा रही गतिविधियों के कारण अपने को बचाये रखने के लिये अत्यन्त चुनौतियों का सामना कर रहें हैं।

भारत में कछुओं की 29 प्रजातियाँ पायी जाती है जिनमें 24 प्रजाति के कच्छप एवं 5 प्रजाति के कुर्म हैं जिनमें से अधिकांष कछुवें भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की विभिन्न अनुसूचियों के अन्तर्गत संरक्षित हैं। किन्तु इन कछुओ की प्रजातियों, इनके वितरण के क्षेत्रों तथा प्रकृति में इनकी पारिस्थितिक महत्व के बारे में लोगों का ज्ञान अत्यन्त कम है।

टर्टल सवाइवल एलायन्स इन्डिया, एक दशक से अधिक समय से सम्पूर्ण भारत में विभिन्न कछुओं के विभिन्न प्रजाति वाले क्षेत्र में लगातार विभिन्न संरक्षण, अनुसंधान तथा सामुदायिक कार्यक्रमों के माध्यम से स्वच्छ जलीय कछुओं के अतिरिक्त अन्य जलीय वन्यजीवों तथा उनके परिवासों के संरक्षण का कार्य करती आ रही है। 5 कछुआ प्राथमिकता वाले क्षेत्र में यह कार्यक्रम 8 विभिन्न प्रजातियों के साथ विभिन्न इन-सीटू संरक्षण कार्यक्रमों, संरक्षित कालोनी तथा संरक्षित प्रजनन कार्यक्रम के प्रति प्रतिबद्य है ।

विश्व कछुआ दिवस प्रत्येक वर्ष सम्पूर्ण विश्व में कछुओं के प्रति जानकारी एवं जागरूकता बढ़ाने, कछुओं के प्रति लोगों को संवेदनशील बनाने तथा हमारे कछुआ मित्रों के संरक्षण में आम जन को जोड़ने के लिये मनाया जाता है ।

टर्टल सर्वाइवल एलायन्स ( टी०एस०ए० ) इन्डिया ने इस वर्ष विश्व कछुआ दिवस के अवसर पर 'प्लास्ट्रान पिकासो' नाम का एक अप्रत्यक्ष (Virtual) कला प्रतियोगिता का आयोजन किया जिसमें नये नये प्रतिभागियों की चित्रकला को आमन्त्रित किया गया है जिससे वे भविष्य में कछुओं एवं उनके आवास के संरक्षण में अपना सहयोग कर सकें एवं हमारे टर्टल मित्र के प्रति अपना प्यार तथा श्रद्धा दिखा सकें ।

टी०एस०ए० ने इस वर्ष मई माह को कछुआ माह के रूप में मनाते हुये विभिन्न कलाकारों / चित्रकारों, लेखकों, फोटोग्राफरों एवं वन्यजीव उत्साहियों को कछुओं के संरक्षण के प्रति प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से सोशल मीडिया के मंच पर प्रतिदिन कछुओ के सन्दर्भ में विभिन्न सूचनात्मक पोस्ट डालता रहा है l

अब तक टी०एस०ए० के इन कार्यक्रम के द्वारा साल एवं ढोढ़ प्रजाति के कछुओं की 6500 से अधिक अंण्ड़ो को संरक्षित किया है तथा 5000 से अधिक साल एवं ढोढ़ प्रजाति के नवजातों को राष्ट्रीय चम्बल अभयारण्य, उत्तर प्रदेश में चम्बल नदी में विमोचित किया ।

इसके अतिरिक्त कुकरैल घड़ियाल पुनर्वास केन्द्र, लखनऊ में संरक्षण एवं प्रजनन कार्यक्रम के अन्तर्गत स्वच्छ जलीय कछुआ की 13 प्रजातियों का वैज्ञानिक ढंग से प्रजनन करा कर उन पर निगरानी भी कर रही है।

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