खास खबर 👉👉दिल्ली के प्रसिद्ध सूफी संत हजरत निजामुद्दीन औलिया के शिष्य अमीर खुसरो का उर्स पटियाली कासगंज मे सुरु::==देखे विस्तार से


  मध्य एशिया की लाचन जाति के तुर्क सैफुद्दीन के पुत्र अमीर खुसरो का जन्म सन् 1253 ईस्वी (६५२ हि.) में एटा उत्तर प्रदेश के पटियाली नामक कस्बे में हुआ था। .

.. सात वर्ष की अवस्था में खुसरो के पिता का देहान्त हो गया। किशोरावस्था में उन्होंने कविता लिखना प्रारम्भ किया और २० वर्ष के होते होते वे कवि के रूप में प्रसिद्ध हो गए।आज उनका उर्स है : 

लखनऊ : अमीर खुसरो जिनका पूरा नाम अबुल हसन  यमीनुद्दीन अमीर खुसरो था l 

खुसरो तेहरवी व चौदहवी सदी के प्रमुख शायर, लेखक, गायक, संगीतकार, सूफी संत हिंदी खड़ी बोली के पहले  कवि के रूप में देश व दुनिया में जाने जाते हैं।  

सल्तनत मंजिल, हामिद रोड, निकट सिटी स्टेशन, लखनऊ के रॉयल फेमिली के नवाबजादा सय्यद मासूम रज़ा, एडवोकेट ने कहा की एटा, कासगंज और पटियाली को  पहचान देश वा दुनिया से अमीर खुसरो ने कराई। खुसरो का जन्म 27 दिसंबर 1253  में पटियाली में हुआ था।

 हिंदी वा फारसी में एक साथ लिखने वाले भारत के ऐसे पहले कवि के रूप में इनकी पहचान है। बहुत ही कम उमर में वो  दिल्ली के प्रसिद्ध  सूफी संत  हजरत निजामुद्दीन  औलिया के शिष्य बने थें और वो 16 व 17 साल की उम्र में  एक अच्छे शायर के रूप में जाने जाने लगे। सन  1325 में अमीर खुसरो  ने दिल्ली में दुनिया को अलविदा कहा। उन्हें सूफी संत हजरत निजामुद्दीन  के मजार के करीब ही दफन किया गया!  अमीर खुसरो  की मशहूर रचना  : काहे को ब्याहे विदेश.....आज भी लोग गुनगुनाते रहते हैं।



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