ब्रेकिंग सूर्य_ग्रहण आज ---सबसे लंबा सूर्यग्रहण आज जाने लाभ और हानि के बारे में.आइए जानें इस दौरान क्या करें, क्या न करें ::--स्वामी कृष्णनन्द हरिद्वार के अनुसार


#सूर्य_ग्रहण 21 जून 2020 सुबह 09:16 शुरू होगा सूर्य ग्रहण है।


 हिन्दू पंचांग के अनुसार ग्रहण कृष्ण पक्ष में आषाढ़ अमावस्या तिथि पर मिथुन राशि (मृगशिरा नक्षत्र) में 21 जून 2020 को सूर्य ग्रहण लग रहा है। यदि सूर्यग्रहण रविवार को पड़ता है तो उसे 'चूड़ामणि ग्रहण' कहते हैं। रविवार को सुबह 9 बजकर 16 मिनट पर ग्रहण शुरू होगा। जबकि दोपहर 12 बजकर 10 मिनट पर सूर्य ग्रहण का मध्यकाल होगा। दोपहर बाद 15 बजकर 04 मिनट पर ग्रहण की समाप्त हो जाएगा। लेकिन इस सूर्यग्रहण का आरंभ और समापन का समय भारत में अलग-अलग रहेगा, दिल्ली में सूर्यग्रहण सुबह 10 बजकर 20 पर ग्रहण शुरू होगा।


 दिल्ली में दोपहर 12 बजकर 01 मिनट पर सूर्य ग्रहण का मध्यकाल होगा। दिल्ली में दोपहर बाद 13 बजकर 48 मिनट पर ग्रहण समाप्त हो जाएगा। इसके बाद साल 2020 के अंत में एक और सूर्य ग्रहण लगेगा। इस बार सूर्य ग्रहण अपने देश भारत में भी देखा जा सकेगा। लेकिन इसे नंगी आंखों से देखने का प्रयास कतई न करें। 


    ये सूर्य ग्रहण कुंडलाकार है। कुंडलाकार ग्रहण ‘रिंग ऑफ़ फायर’ बनाता है। इसे कंकणाकार ग्रहण भी कहते हैं। यह सूर्य ग्रहण देश के कुछ भागों में पूर्ण रूप से दिखाई देगा।


 निर्णय सागर पंचाँग -- अक्षांश रेखांशादि सारिणी रचना अनुसार 


     


    दिल्ली के स्टेण्डर्ड और मध्यप्रदेश के निम्न शहर 


        कस्वे में अंतर 


        #ऊँकारेश्वर --- = - 26


        #खण्डवा ----- = - 25


        #इन्दौर ------- = -27


        #शिवपुरी -------- = - 19


         #कराहल ------ = -- 14


          


    


ग्रहण का सूतक:--


सूर्यग्रहण का सूतक 12 घंटे पहले लग जाता है। इस बार सूर्यग्रहण रविवार को लग रहा है। ऐसे में शनिवार, 20 जून को ही रात 9 बजकर 16 मिनट से सूतक काल शुरू हो जाएगा, जो कि ग्रहण की समाप्ति तक रहेगा। लेकिन सूर्यग्रहण का आरंभ सूतक का समय भारत में अलग-अलग रहेगा। दिल्ली में सूर्यग्रहण का सूतक 20 जून को रात 10 बजकर 20 मिनट से सूतक काल शुरू हो जाएगा, जो कि ग्रहण की समाप्ति तक रहेगा।


विशेष :::÷


ग्रहण समाप्ति के बाद गंगा, जमुना, सरस्वती या किसी पवित्र नदी में स्नान करें। इस बार कोरोना की वजह से संभव न हो तो घर पर तीर्थ जल मिलाकर स्नान करना चाहिए। ग्रहण के बाद स्नान करने का विधान इसलिए बनाया गया ताकि स्नान के दौरान शरीर के अंदर ऊष्मा का प्रवाह बढ़े, भीतर-बाहर के कीटाणु नष्ट हो जाएं और धुल कर बह जाएं।


आइए जानें इस दौरान क्या करें, क्या न करें :


हमारे ऋषि-मुनियों ने सूर्य ग्रहण लगने के समय भोजन के लिए मना किया है, क्योंकि उनकी मान्यता थी कि ग्रहण के समय में कीटाणु बहुलता से फैल जाते हैं। खाद्य वस्तु, जल आदि में सूक्ष्म जीवाणु एकत्रित होकर उसे दूषित कर देते हैं। इसलिए ऋषियों ने पात्रों के कुश डालने को कहा है, ताकि सब कीटाणु कुश में एकत्रित हो जाएं और उन्हें ग्रहण के बाद फेंका जा सके।


ग्रहण की अवधि में तेल लगाना, भोजन, जल पीना और मंजन करना वर्जित किए गए हैं।


ग्रहण के दिन पत्ते, तिनके, लकड़ी और फूल नहीं तोड़ने चाहिए। 


गर्भवती महिलाओं को सूर्य-चंद्र ग्रहण नहीं देखने चाहिए, क्योंकि उसके दुष्प्रभाव से शिशु अंगहीन होकर विकलांग बन सकता है, गर्भपात की संभावना बढ़ जाती है। गर्भवती महिला को विशेष सावधान रहना चाहिए और कुछ भी कैंची या चाकू से काटने को मना किया जाता है और किसी वस्त्रादि को सिलने से रोका जाता है। 


इस दौरान कोई शुभ कार्य नहीं करते, क्योंकि ग्रहण को अशुभ माना जाता है।


सूर्य ग्रहण के समय एक रुपए का सिक्का पूजा स्थल पर रखकर सूर्य भगवान के मंत्रो का स्मरण करें और ग्रहण के बाद इसे गंगाजल से धोकर लाल कपड़े में लपेटकर अपनी तिजोरी में रख लें। इससे आपको सूर्य ग्रहण के पुण्य का प्रभाव मिलेगा।


सूर्यग्रहण का दान ::++


ग्रहण के दौरान किए गए दान का फल अक्षय होता है। ग्रहण समाप्ति के पश्चात तेल या कंबल का भी दान कर सकते हैं।


अगर घर के लोग बीमारी से परेशान हैं तो सूर्यग्रहण के बाद काले और भूरे रंग के कंबल का दान करें। 


ग्रहण के बाद गायों को घास, पक्षियों को दाना, जरूरतमंदों को वस्त्रदान या छाते का दान करने से अनेक गुना पुण्य प्राप्त होता है।


ग्रहण के समय सूर्य देव की उपासना वाले मंत्रों का जप-ध्यान करने से कई गुना फल प्राप्त होता है।


     मात_गंगेहर#नर्मेदे_हर#जटाशंकरेहर 


ॐ नमः पार्वतीपतये हर हर हर महादेव 💐💐💐


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